Sunday, 7 July 2013

Lo Ramzaan Aa Gaya

माहे रमज़ान की रौनक
शाबान का महिना ख़त्म होने को आ रहा है। अब एक महिना आएगा जीसके पूर्ण  तीस दिन सिर्फ इबादत और परहेज़गारी में गुजारना है। आखिर क्या है ये यह महीने में कि  तमाम मुस्लिम विश्व ये पर्व का इतनी बेसब्री से इंतज़ार करता है? आखिर क्या ख़ास बात है इसमें? यदि भारत  की  बात की जाये तो यह महिना हमारे देश में भी बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है। लो आ गया माहे रमज़ान। नैमतो और अल्लाह के रेहेम  का महिना है है रमज़ान। इस रमज़ान में आये बात करते है हमारे भारत में रहते हुए मुसलमान भाई - बन्धुओ की। हमारी देश की यही तो ताक़त है की यहाँ पर हर एक पर्व किसी जाती-पाती  के भेद भाव बिना मनाया जाता है। यही हमारी पूँजी है और यही हमारी ढाल। हाँ , तो हम बात कर रहे थे इस पाक महीने रमजान की। इस्लामी कैलेंडर के हिसाब से जब शाबान का महिना ख़त्म होता है तब रमजान का इस्तकबाल होता है। यह मुबारक महिना भारत के तमाम मुस्लिम प्रभुत्व  इलाको में जैसे ख़ुशी की लहर फैला देती है। यदि बात की जाए मुंबई की, तो मुंबई के मुस्लिम इलाके जैसे भेंडी बाज़ार , डोंगरी , नागपाडा , मदनपुरा , गोवंडी , कुर्ला , मुंब्रा इत्यादि इन इलाको की रोनक देखते ही बनती है। वो सहरी की उत्सुकता , वो नमाज़ों की पाबंदी , वो कुरान की तिलावातें , वो रोज़े की शिद्दत और वो इफ्तार की ख़ुशी। और रात में लज़ीज़ पकवान, और तरावीह की नमाजें यह सब चीज़ें किसी मुस्लिम दोस्त को पूछीये और वो आपको विस्तार में बतायेगा की रमजान की रौनक क्या होती है।  
रमज़ान महिना सब महीनो में सर्वश्रेष्ठ महिना है। इसमें अल्लाह तआला की रहमत चंदाचंद होती है। ऐसा कहते है की रमजान में हर चीज़ का एक का सत्तर मिलता है। एक नेकी के बदले सत्तर नेकियाँ मिलती है और एक गुनाह के बदले सत्तर गुनाह मिलते है। इस महीने का सबसे महत्त्वपूर्ण सन्देश होता है स्व:नियंत्रण। नियंत्रण करना अपने आप पर , अपनी इच्छाओं पर , अपनी वासनाओं पर, अपनी नीयतो पर, और इन चीजों को नियंत्रण  में रखना यही इस पाक माह का उपदेश है। भूख प्यास पर नियंत्रण रखना ही रोज़ा नहीं है। रोज़े के मायने कई गहरे और परिपक्व है। अपने आप पर अपना ही नियंत्रण रखना यही इस महीने का परम ज्ञान है। भूख-प्यास बर्दाश्त करने के साथ जुबां, आँख, कान और आत्मा इन सब चीजों से राजा होता है। इंसान में सेल्फ-कंट्रोल लाता है ये रोज़ा। कई हदीसे है जो इस महीने की शान और एहमियत का तकाज़ा बताती है। रमजान का महिना बहुत ही पावन है, इससमे फिरिश्ते दुनिया के चारो ओर होते है, और इंसान को मग्फेरत अर्थात माफ़ी के दरवाज़े खुल जाते है। इस महीने को इस्लामी महीनों का सरदार कहा गया है। तो इस  रमजान किसी भी मुस्लिम दोस्त के यहाँ जायें  और उसे मुबारक कहें और कहें की आप को दुआओं में याद रखे क्योंकि ये महिना दुआ कुबूलियत का भी है। जितने गुनाह किये है वो सारे माफ़ हो जायेंगे यदि इस महीने में उस अर्श के मालिक रब से सच्चे दिल से तौबा की जाये। वो रमजान की रौनकें ऐसी है जो शब्दों में बयाँ करना 
जैसे असंभव  है क्योकि वो  एक अनोखा  एहसास है जिसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है। तो आइये  इस रमजान हम भी एक प्रण ले की  स्वतः को हम नियंत्रिक रखेंगे। बुरी आदतों से परहेज़ करेंगे और जलन, गुस्सा, घमंड जो ये सारे अहंकार पैदा करने वाले जज़्बात है इनपर काबू  रखेंगे।
और किसी मुस्लिम दोस्त या पडोसी को पूरी तरह मदद करेंगे की वे अपने तमाम रोज़ो  को आराम से कर सकें। इससे हम भी व्यक्तिगत रूप से सुकून पाएंगे और इस मुबारक महीने की दुआओं का हिस्सा बनेंगे। आप सभी को रमजान महीने की हार्दिक शुभकामनायें। और हाँ, मोहोम्मद अली रोड पे वो पकवान मत भूलिएगा। ठीक है, सभी भारतवासियों  को ये माहे रमजान बहोत बहोत मुबारक हो। और इस महीने में दुआ करें की भाईचारा और  खुशहाली यही बनी रहे। या अल्लाह हमारी दुआओं को सुन लेना। आमीन।


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